Monday, 20 June 2016

पथिक



पथिक!
कर अथक प्रयास
रुक मत, बुत बन जाएगा
चीर चट्टान का सीना
निकाल स्वर्ण चिराग
पथिक ! कर अथक प्रयास

पथिक!
बना पार्थिव को पार्थ
चढ़ा प्रत्यंचा भेद चक्षु
तब पा सकेगा 
अधर्म पर धर्म की विजय,
चलता चल, सब व्यर्थ अभिलाषाओं का परित्याग 
पथिक! कर अथक प्रयास

पथिक!
जीवन है कांटों की शैय्या
बना इसे फूलों की सेज
निष्कपटता से बढ़े जा-चले जा
परिवर्तन से कर जग का सुहास
पथिक! कर अथक प्रयास।


फसक ः भास्कर शर्मा 


No comments:

Post a Comment