गुरू... हमें ना सताइए
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| प्रतीकात्मक तस्वीर |
मारिए, मारिए कस के मारिए
हर स्टाइल से मारिए
ऊपर-नीचे,
दाएं-बायें
धुआं उड़ाइये, छल्ले बनाइये
सिगरेट का बंडल मिनटों में फूंक डालिए
पर, गुरू हमें ना सताइए
पीजिए-पीजिए, रजनी स्टाइल में पीजिए
अरे भई, बीड़ी फूंकिये, सिगरेट फूंकिये
हो सके तो गांजा भर के फूंकिये
अपने केबिन को शौक से गैस चेम्बर बनाइये
फेफड़ों में खूब टार जमा करिये
पर, गुरू हमें ना सताइए
ये जो आप सिगरेट सुलगाने के साथ
केबिन का एडजस्ट फैन ऑन कर देते हैं ना
बाय गॉड, तंत्रिका तंत्र बिगड़ जाता है
नाक में धुंआ घुसने के साथ ही
ब्रह्मांड हिल जाता है
करिए, सिगरेट के साथ हीं-हीं, ठा-ठा खूब
करिए
पर, गुरू हमें ना सताइए
आप मौज से पीजिये और
दीजिये, दूसरों को दीजिए
सिर दर्द, सीना दर्द दीजिये
चाहो तो केजरी खांसी लगवा दीजिये
हो सके तो लोगों की सांसें बंद करवा
दीजिए
जो हों आपके इस शौक से खुश
सबको बेचैन करिये, परेशान करिये
पर, गुरू हमें ना सताइए
वाह गुरू... बहुत खूब
आप दफ्तर में पीजिए और धुंआ हमारे मुंह में
छोड़िए
अट्टहास कर फूंकिये और शर्म हमसे कराइये
मानो तो एक दरख़्वास्त है
सिगरेट छोड़िए, जियो और जीने दो की राह
अपनाइए
नहीं मानते, भाड़ में जाइए
पर, गुरू हमें ना सताइए

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